विंध्याचल मंदिर की संपूर्ण जानकारी, इतिहास | Vindhyachal mandir|

विंध्याचल मंदिर की संपूर्ण जानकारी, इतिहास | Vindhyachal mandir 2022|

विंध्याचल मंदिर

हमारे देश भारत में अनगिनत मंदिर है हर मंदिर की अपनी अलग कहानी और पहचान है | भारतीय मंदिरों की प्रसिद्धि बहुत अधिक है, विदेशी लोग भी इन भारतीय मंदिरों के भ्रमण में पीछे नहीं रहते हैं | आज हम आपको भारत के एक अनोखे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसका नाम है विंध्याचल यह नाम तो आपने सुना ही है |

विंध्यवासिनी मंदिर का इतिहास

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में विंध्याचल स्थित है  विंध्याचल का अर्थ विंध्य + अचल का मतलब है, पृथ्वी को बेध कर उत्पन्न हुआ | यह विंध्याचल की पहाड़ियां भारत के मध्य में स्थित है वाराणसी से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित विंध्याचल प्रकृति की अनोखी सुंदरता के बीच खूबसूरत विंध्याचल की पहाड़ियां घने वृक्षों झाड़ियों से भरी हरियाली युक्तियां क्षेत्र अत्यंत ही मनमोहक है |

धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व बहुत अधिक है देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है, हमारे देश के प्राचीन ग्रंथों वेदों से लेकर रामायण ,महाभारत सभी सभी जगह विंध्य का वर्णन मिलता है |

विंध्य क्षेत्र मां विंध्यवासिनी को समर्पित है कहते हैं कि इसी स्थान पर तप करने पर सिद्धि मिलती है | वेदों के अनुसार यह स्थान कभी भी नष्ट नहीं हो सकता |  सृष्टि के उत्पन्न होने से पहले और सृष्टि के विनाश के बाद भी रहेगा  | इसी स्थान पर माता विंध्यवासिनी का भव्य मंदिर है लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए यहां आते हैं, गंगा तट पर स्थित  इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत अधिक भीड़ होता है |
इस क्षेत्र में मुख्य रूप से माता के 3 मंदिर  विंध्यवासिनी , महाकाली, अष्टभुजा मंदिर है | मंदिर के पीछे नदी है  बाहर से आने वाले श्रद्धालु यहां पहले स्नान करते हैं फिर दर्शन के लिए मंदिर में आते हैं|

विंध्यवासिनी मंदिर –

विंध्यवासिनी मंदिर यह मंदिर अत्यंत ही सुंदर है मंदिर में स्थित मां की विशाल मूर्ति है जोकि अत्यंत ही अद्भुत है | पौराणिक कथा के अनुसार – जब वासुदेव ने श्रीकृष्ण  को नंद के यहां छोड़ कर उनकी पुत्री को लेकर वापस आए |  कंस वासुदेव देवकी के सभी संतानों को मार रहा था क्योंकि आकाशवाणी के अनुसार वासुदेव की संतान  उसका वध करेंगे |

कंस बहुत ही दुष्ट और अधर्मी राजा था | जब कंस ने वासुदेव से नंद की पुत्र को जो उनको वासुदेव की पुत्री समझकर मारने चाहा | तो उस नवजात शिशु ने दुर्गा का रूप धारण कर लिया और  कृष्ण द्वारा कंस के वध की भविष्यवाणी की  |  धर्म ग्रंथों के अनुसार इसे मां दुर्गा का रूप तो कहीं कहीं मां पार्वती के  माया रूप  कहा गया है |

महाकाली मंदिर –

महाकाली मां विंध्यवासिनी के दर्शन के उपरांत श्रद्धालुओं को 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महाकाली के दर्शन के लिए जाना होता है| रास्ते में एक अति सुंदर काली गुफा मां काली गुफा है जो कि मुख्य आकर्षण है वहां का कुछ दूरी पर मां काली का मंदिर है पौराणिक कथा के अनुसार रक्तबीज नामक राक्षस जो कि ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि यदि उसके रक्त का एक बूंद भी जमीन पर गिरता है तो उससे  राक्षस पैदा होंगे | अपने इस वरदान के परिणाम स्वरुप उसने अत्याचार करना शुरू कर दिया और निर्दोष लोगों को मारने लगा |

माता के इस रूप का सृजन राक्षस का अंत करने के लिए हुआ था मां काली ने आकाश की ओर मुख करके उसके शरीर से  गिरने  वाले रक्त बूंद का पान किया | मंदिर में स्थित माता की यह प्रतिमा इसका संदेश संकेत देती है, प्रतिमा में माता का मुंह ऊपर की ओर है | मंदिर  की प्राकृतिक एवं भौगोलिक स्थिति इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं वही प्रतिमा के रूप में मां का भयंकर रूप जोकि अत्यंत ही आकर्षण है |

अष्टभुजा मंदिर –

अष्टभुजा मंदिर काली खोह से 4 किलोमीटर की दूरी पर विंध्य पर्वत अष्टभुजा मंदिर है ,मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ों को काटकर सीढ़ियां बनाई गई है लगभग सीढ़ियां की संख्या 511 है |

जिसके द्वारा आप मंदिर तक पहुंच सकते हैं या फिर घुमावदार सड़कों से होते हुए निजी वाहन से द्वारा भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है यह मंदिर भी बहुत ही सुंदर है |
विंध्याचल में स्थित इन तीनों मंदिरों की पूजा करने के बाद ही त्रिकोण परिक्रमा  संपन्न होती है एक साथ इन तीनों मंदिरों में दर्शन करने का विशेष लाभ होता है |

सीता कुंड , एक अनोखी परंपरा –

सीता कुंड यह एक छोटा सा जल स्रोत है जो कि कभी भी सुखता नहीं है, पुराने कथा के अनुसार मां सीता राम और लक्ष्मण वन में निवास कर रहे थे | तब मां सीता ने यहां पर स्नान किया था तभी से इस जगह का नाम सीता कुंड पड़ा, सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि यहां आस-पास के गहरे जल स्त्रोत ही भयंकर गर्मी के दिनों में सूख जाते हैं परंतु या जलस्रोत कभी नहीं सकता है| कुंड के समीप में ही माता सीता ने एक शिवलिंग की स्थापना की जिसके कारण यह स्थान सितेश्वर के नाम से भी जाना जाता है |

नवरात्र के महीने में इस कुंड में स्नान करने के लिए महिलाओं की बहुत अधिक भीड़ होती है मान्यता है कि सीता कुंड  में स्नान करके पितरों को पूजा तथा जल देने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है |
यह पूरा क्षेत्र मंदिरों से भरा हुआ है दूर से ही आपको मंदिरों के घंटियों की आवाज सुनाई देगी सड़कों के दोनों ओर दुकानें हैं | जहां आपको और सब ताकि सभी सामान मिल जाएंगे मंदिर के पास की दुकानों पर आपको पूजा सामग्री, पुष्प, प्रसाद आदि सब कुछ मिल जाएगा |

विंध्याचल पर्वत का रहस्य

यूं तो देश में बहुत सारे पर्वत मालाएं हैं उनमें से एक विंध्याचल भी है ,जो कि अद्वितीय है | पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में पर्वत बहुत ही शक्तिशाली होते थे वह चल फिर सकते थे यहां तक कि उड़ भी सकते थे | एक बार विंध्य पर्वत और हिंद पर्वत ने इस बात की जंग छिड़ गई कि उन दोनों में शक्तिशाली कौन है अतः दोनों पर्वत ने अपना आकार बढ़ाना शुरू कर दिया विंध्य पर्वत ने अपना आकार इतना बढ़ा दिया जिसके कारण दक्षिण के लोगों को सूर्य की रोशनी मिलना मुश्किल हो गया |

तब देवताओं के निर्देश पर महर्षि अगस्त्य विंध्य पर्वत से मिलने गए ,क्योंकि विंध्य अगस्त्य मुनि  का शिष्य था और वह अपने गुरु को कभी भी मना नहीं कर सकता था | अगस्त्य मुनि वहां पहुंचे तो  विंध्य ने झुककर गुरु को प्रणाम किया तब उन्होंने कहा कि पुत्र मुझे दक्षिण की ओर जाना है , किंतु तुम्हारे इस विकराल रूप के कारण मैं उधर नहीं जा सकता | 

यह बात सुनकर विंध्य बोला  गुरु आप अवश्य दक्षिण की ओर जाएंगे और उसने अपना रूप छोटा कर लिया | तब गुरु  ने कहा कि जब तक मैं वापस नहीं आ जाऊं  तब तक तुम ऐसे ही रहना | गुरु की आज्ञा से विंध्य झुका  रहा  |उसकी प्रतीक्षा आज तक गुरु के लौटने की है परंतु महर्षि अगस्त आज तक लौट कर वापस नहीं आए और आज भी विंध्य पर्वत गुरु के इंतजार में खड़ा है |


कुछ शोध से पता चला है कि विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक तत्वों से भरा हुआ है, विंध्य की पहाड़ियां अपने में अनेको रहस्य को छुपाए हुए हैं शुरुआती शोध में यह पता चला है कि यहां पर पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस जैसे बहुमूल्य पदार्थ है हालांकि अभी इन पर रिसर्च हो रहा है |

विंध्याचल कॉरीडोर क्या है?

1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में विंध्याचल कॉरीडोर शिलान्यास किया गया | अब यहां पर कॉरीडोर   का निर्माण होगा, कॉरीडोर के निर्माण से पर्वत पर बने इस मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लग जाएंगे |
इसके साथ ही मंदिर की सुंदरता और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां और भी कई तरीके के निर्माण कार्य कराए जाएंगे | प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस क्षेत्र में पर्यटन की भरपूर संभावनाएं हैं|

स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यूपी सरकार की तरफ से यहां कई तरीके के कार्य किए जा रहे हैं | बेशक विंध्याचल कॉरीडोर के निर्माण माता का दर्शन करना और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा | इस परियोजना का कुल कीमत 130 करोड़ रुपए है |

प्रकृति की सुंदरता से भरा यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के मुख्य पर्यटक क्षेत्रों में से एक है | ना केवल मंदिर बल्कि सुंदर विंध्य पर्वत मालाएं, झरना ,पठार एवं हरे-भरे  क्षेत्र सबसे अलग है | पशु पक्षियों से युक्त इस क्षेत्र में शांति का अनुभव होगा ,यहां की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता | दूर – दूर तक फैली हुई छोटी बड़ी पहाड़ियां   नुकिले पत्थर और उनके बीच से गिरते हुए झरने अत्यंत मनोहारी लगते हैं |

एक बार अवश्य आएं विंध्याचल

FAQS

Q.1 विंध्याचल मंदिर कहां पर है?

A. मीरजापुर ( उत्तर प्रदेश ) |

Q.2 विंध्याचल में कितनी सीढ़ी है?

A. 511 सीढ़ियां |

Q.3 विंध्याचल क्यों प्रसिद्ध है?

A. इस शक्तिपीठ में माता विंध्यवासिनी सशरीर विराजमान है जबकि देश के अन्य शक्तिपीठों में माता के शरीर का एक अंग ही गिरा है |

Q.4 विंध्याचल पर्वत की लंबाई कितनी है?

A.  970 किलोमीटर लंबा और 910 मीटर ऊंचा है।

Q.5 विंध्याचल किस जिले में है?

A.  मिर्जापुर जिला |

Q. 6 विंध्याचल किस नदी के किनारे पर स्थित है ?

A. गंगा नदी |

Q.7 विंध्याचल मंदिर का ऑफिशियल वेबसाइट कौन सी है?

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4 thoughts on “विंध्याचल मंदिर की संपूर्ण जानकारी, इतिहास | Vindhyachal mandir 2022|”

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